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02 September 2025
📰नई दिल्ली
✒️ टाइम्स वॉच स्पेशल रिपोर्ट
🚨 सड़क पर घूमते आवारा सांड और गाय: जानलेवा खतरा या अनदेखी गई समस्या?
👉 आइए आज हम बात करते हैं उस समस्या की, जो हर दिन हमारी सड़कों पर जानलेवा रूप लेकर सामने आती है—आवारा पशुओं का आतंक।
भारत के शहरों और कस्बों में आवारा सांड और गायों का सड़कों पर घूमना अब एक मामूली परेशानी नहीं रहा। हर साल सैकड़ों हादसे, कई मौतें और लाखों का नुकसान केवल इसी कारण होता है। सवाल ये है कि आखिर कब तक इन बेजुबान जानवरों की अनदेखी होती रहेगी और इंसानों की जान सड़कों पर दांव पर लगती रहेगी?
🐂 समस्या कितनी गंभीर है?
- ट्रैफिक जाम और हादसों की बड़ी वजह।
- रात में अचानक सड़क पर आना – मोटरसाइकिल और कार सवारों की मौत का कारण।
- किसानों की फसलों का नुकसान – महीनों की मेहनत बर्बाद।
- बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा असुरक्षित।
🔍 जड़ों में झांकें तो—
- दूध देना बंद करने या बूढ़ा होने पर पशुओं को लावारिस छोड़ देना।
- धार्मिक आस्था के चलते वध पर रोक, संख्या लगातार बढ़ रही।
- चरागाहों का खत्म होना, शहरी विस्तार ने इनके प्राकृतिक ठिकाने छीने।
⚠️ खतरा हर किसी के लिए
- अचानक सड़क पर आए सांड से कार एक्सीडेंट।
- पैदल चलने वाले पर हमला।
- किसानों की फसलें चट।
- रात में हाईवे पर ट्रक/बस की जानलेवा टक्करें।
✅ समाधान क्या हो सकता है?
- गोशालाओं का आधुनिकीकरण: बायोगैस और जैविक खाद से आत्मनिर्भर मॉडल।
- सख्त कानून: लावारिस छोड़ने वालों पर जुर्माना और सजा।
- जागरूकता अभियान: लोगों को समझाना कि जानवरों को छोड़ना सिर्फ समस्या नहीं, पशु क्रूरता है।
- नसबंदी कार्यक्रम: आबादी को नियंत्रित करना ज़रूरी।