Times Watch देश दुनिया
रखे हर खबर पर पैनी नजर | खबर को सच की छलनी में छान कर झूठ को कूड़े में डाल कर आप तक लाते हैं।
दम तो तोड़ते सच को बचाने की कोशिश।
Times Watch देश दुनिया, रखे हर खबर पर पैनी नजर…'
काले सच की सीरीज़: वोट चोरी का खेला — राहुल गांधी के दावों की जांच (Part 1)
क्या हुआ और क्यों महत्त्वपूर्ण है
हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से EVM/VVPAT और मतदाता सूची (electoral rolls) से जुड़ी गंभीर आरोप-प्रस्तावनाएँ कीं — उन्हें लेकर उन्होंने कहा कि देश में वोट चोरी हो रही है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता कम है। ये बयान राजनीतिक वातावरण में भारी हलचल पैदा कर रहे हैं क्योंकि एक बड़े विपक्षी नेता के आरोप लोकतंत्र की आधारशिला पर सवाल उठाते हैं। Deccan HeraldThe Times of India
1) राहुल गांधी के शक — किस बिंदु से शुरू हुआ?
-
राहुल गांधी ने बार-बार EVM को “ब्लैक बॉक्स” करार दिया है और ईसीआई से 100% VVPAT काउंट और अधिक पारदर्शिता की मांग की है। उन्होंने कुछ ऐसे उदाहरण और आंकड़े सामने रखे जिनके अनुसार वोटर-लिस्ट में बोगस/डुप्लिकेट नाम और वैध मतदाताओं की तस्वीरें नहीं मिलतीं। The New Indian ExpressDeccan Herald
-
राज्यों के हालिया चुनावों में (उदा. हरियाणा 2024) कांग्रेसी नेतृत्व ने दावा किया कि जब गिनतियाँ हुईं तो बैलट-आधारित संकेतों के मुकाबले EVM-आधारित परिणाम उलट दिखे — और इन्हें आधार बनाकर शक हुआ। The Indian ExpressThe Times of India
2) मुख्य मीडिया / बड़े अखबारों ने किस तरह रिपोर्ट किया?
-
द हिन्दू / इंडियन एक्सप्रेस / इकोनॉमिक टाइम्स / रीटर्स प्रमुख रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस, ईसीआई की प्रतिक्रिया और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी सुनवाईयों को कवर्ड कर रहे हैं — रिपोर्टें आम तौर पर तथ्यों और आधिकारिक बयानों पर आधारित हैं, और ये बताते हैं कि ईसीआई ने कई बार कहा है कि EVMs पर भरोसा किया जाना चाहिए और अवैज्ञानिक दावों के विरुद्ध प्रमाण माँगा गया। The New Indian ExpressThe Economic TimesReuters
-
कुछ पब्लिकेशन्स ने राहुल के दावों की फैक्ट-चेक जाँच की और पाया कि कई वायरल क्लेम्स — जैसे “EVM हैकिंग का वीडियो” — बेसलेस निकले या पुलिस/ईसीआई ने उन्हें खारिज कर दिया। India Today
3) कोर्ट और रेगुलेटरी रेव्यू — सच कहाँ तक पहुँचा?
-
सुप्रीम कोर्ट ने कई बार EVM/VVPAT से जुड़े रिट-पिटिशन पर सुनवाई की — 26 अप्रैल 2024 के निर्णय में कोर्ट ने 100% VVPAT-सत्यापन की मांग खारिज कर दी और कहा कि वैज्ञानिक/प्रामाणिक तरीके से प्रश्न उठाना चाहिए; कोर्ट ने व्यापक बदलाव नहीं दिए। इससे अदालत के स्तर पर तुरंत-सिद्ध प्रमाण की मांग का संकेत मिला। The Economic TimesSCI API
-
Election Commission of India (ECI) ने ऐसे दावों पर अक्सर साक्ष्य-मांग की और कुछ मामलों में FIR/कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए जब झूठे या भ्रामक दावे सामने आए। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी पार्टियों का कहना है कि ECI पारदर्शिता बढ़ाने में पीछे है। India TodayDeccan Herald
4) किन दावों की जांच हुई और क्या नतीजा आया? (मुख्य-मुख्य घटनाएँ / टाइमलाइन)
-
2017–2019: कोर्ट-स्तर पर EVM-आलोचनाएँ और सुनवाईयाँ; कई याचिकाएँ खारिज। The Economic TimesSCI API
-
2023–2024: वायरल वीडियो और “हैकर” दावे — पत्रकारों और फैक्ट-चेकर्स ने उन्हें खारिज किया; ECI ने कई दावों को बेसलेस बताया। India Todaywww.ndtv.com
-
2024–2025: चुनावों के बाद विपक्षी नेताओं (राहुल समेत) द्वारा नई सूचनाएँ और संशय; कुछ राज्य-स्तरीय मामले (जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक के हिस्से) में आरोप लगाए गए और राजनीतिक बहस छिड़ी — पर कोर्ट/ECI तक पहुँच कर सबूत-आधारित नतीजे सीमित रहे। The Times of IndiaDeccan Herald
5) निष्कर्ष — दावों की सच्चाई कहां है?
-
फैक्ट: कई आरोपों पर मीडिया-फैक्ट-चेक और ईसीआई/पुलिस ने जांच करके कुछ दावों को खारिज कर दिया है; कुछ मामले अभी सार्वजनिक प्रमाणों की कमी के कारण न्यायिक रूप से तय नहीं हुए। India TodayThe Economic Times
-
राजनीतिक-संदर्भ: राजनीतिक नेताओं के आरोप अक्सर राजनीतिक दबाव/चुनावी रणनीति के हिस्से भी हो सकते हैं — इसलिए हर दावे को डॉक्यूमेंटेड सबूत की ज़रूरत है। Deccan HeraldThe Times of India
स्रोत
(प्रमुख रिपोर्ट और केस):
-
Deccan Herald — Rahul Gandhi आरोप और प्रेस कॉन्फ्रेंस (Aug 7, 2025). Deccan Herald
-
New Indian Express — Rahul की मांगें (Jun 17, 2024). The New Indian Express
-
Economic Times / Reuters — सुप्रीम कोर्ट ने 100% VVPAT-मांग पर फैसला (Apr 26, 2024). The Economic TimesReuters
-
India Today fact-check — वायरल हैकिंग वीडियो खारिज (Nov 29, 2024). India Today
-
Times of India — राज्य चुनावों में कांग्रेसी दावे (Haryana 2024 रिपोर्ट). The Times of India
