कबीर नगर कर्दमपुरी का ओपन बारात घर जनता को तोहफा या धोखा था ? (Article)


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03 September 2025

📰नई दिल्ली 

📰 Times Watch एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

महिपालपुर टनल के पास एक कार, जो राजस्थान से बदरपुर जा रही थी, एक खड़े हुए डंपर से टकरा गई। इस दुर्घटना में बृजरानी (46), उनकी बेटी विमल (23) और पोता आयांश (4) की मौके पर मौत हो गई। चार अन्य लोग घायल हुए; डंपर चालक विपिन कश्यप को गिरफ्तार किया गया है। हादसे का मुख्य कारण सड़क पर चेतावनी संकेतों और रिफ्लेक्टर्स का न होना बताया गया है।

आइए, आज हम आपको सैर कराते हैं एक शानदार ओपन बारात घर की!

रिपोर्ट  

“आइए, आज हम आपको सैर कराते हैं एक शानदार ओपन बारात घर की — ये जो चमचमाती नीली टीन शेड और आधुनिक पीली लाइट वाला बोर्ड आप देख रहे हैं, यही है बाबरपुर विधानसभा का ओपन बारात घर। मैं आपका दोस्त रिज़वान, Times Watch की एक खास रिपोर्ट के साथ।”

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि असली ड्रामा तो यहीं से शुरू होता है।

इलाके के लोगों की बरसों पुरानी मांग थी कि कबीर नगर और कर्दमपुरी में एक सरकारी स्कूल और एक समुदाय भवन बने। चुनावी मंचों पर विधायक गोपाल राय ने यह वादा भी किया। मगर, जब मौक़ा आया तो समुदाय भवन बनाने की जगह गंदे नाले के ऊपर टीन शेड डाल दिया गया और उसे ओपन बारात घर” नाम दे दिया गया।

लोगों ने मजबूरी में इसे स्वीकार किया, लेकिन सोचिए — शादी-ब्याह में मेहमान हों और पास ही से गंदे नाले की दुर्गंध और मच्छरों की फौज उठे! यह किस तरह का समुदाय भवन था?

लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब दिल्ली नगर निगम के 2022 के परिसीमन (delimitation) के बाद कर्दमपुरी को कबीर नगर से अलग करके एक नया वार्ड बनाया गया और यहाँ से भाजपा के काउंसलर मुकेश कुमार बंसल चुने गए। उन्होंने इसे 'अतिक्रमण' और 'अवैध निर्माण' बताते हुए शिकायत कर दी। सांसद परवेश वर्मा भी पहुँचे और इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।

कर्दमपुरी नाले पर बनाए गए ओपन बारात घर का सरकारी नोटिस बोर्ड।

नतीजा?
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने नोटिस ठोंक दिया — ये ज़मीन सरकारी है, यहाँ अतिक्रमण करना अपराध है। बोर्ड पर साफ़ लिखा गया कि अगर कोई यहाँ क़ब्ज़ा करेगा तो ₹1,00,000 जुर्माना और 6 महीने की जेल।

ओपन बारात घर बंद कर दिया गया।

लेकिन सवाल यहीं खड़ा होता है:

  • अगर विधायक को पहले से पता था कि ये ज़मीन सरकारी और संवेदनशील है, तो जनता को यह झूठा सपना क्यों दिखाया गया?
  • जनता का कसूर क्या था, जो उसे बाद में “दबंग” या “बदमाश” कहकर बदनाम किया गया?
  • क्या यह चुनावी वादों की आड़ में जनता के साथ किया गया एक खुला धोखा नहीं?

निष्कर्ष

यह सिर्फ़ एक नाले पर बना टीन शेड नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मानसिकता का आईना है। जहाँ जनता की असली ज़रूरत — स्कूल और समुदाय भवन — को ताक़ पर रखकर, चुनावी नाटक करने के लिए एक गंदे नाले का बारात घर बना दिया गया।

Times Watch पूछता है:
👉 जनता के साथ आखिर कब तक ये खेल खेला जाएगा?

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