मणिपुर फाइल्स: जब लोकतंत्र की चादर में मानवता छलनी हो जाए

 

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Times Watch — मणिपुर फाइल्स: लोकतंत्र की नींव पर सवाल

दो साल का नरसंहार, एक फिल्म की मांग

जॉन इब्राहिम का ताज़ा बयान गूंज रहा है: जहाँ विवेक अग्निहोत्री ने कश्मीर फाइल्स और बंगाल फाइल्स बनाकर सवाल खड़े किए, वहाँ मणिपुर भी स्क्रीन पर चाहता है।

मई 2023 से चल रही हिंसा में:

  • 260 से ऊपर लोग मरे, ६०,००० से ज्यादा लोग रिलीफ़ कैंप में झोंक दिए गए हैं ।
  • ४,७८६ घर जले, ३८६ पूजा स्थल (चर्च व मंदिर) ध्वस्त हुए ।
  • Amnesty International ने आगाह किया कि दो वर्ष बाद भी रिहैबिलिटेशन की कोई ठोस योजना नहीं है, और सरकार से जाँच और न्याय की माँग उठी है ।
मणिपुर हिंसा पर आधारित न्यूज़ ग्राफिक जिसमें आगजनी, विरोध पोस्टर और राज्य का नक्शा दिखाया गया है।"



कानून, विभाजन और राज्य संरचना के सवाल

अधिकारी अभियानों, अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जा को लेकर अदालतों ने जबर्दस्त तनाव पैदा कर दिया, जिससे Meitei–Kuki समुदायों के बीच गहरी दरारें बन गईं ।

Amnesty International कहता है कि 60,000 से अधिक लोग असुरक्षित परिस्थितियों में रह रहे हैं और सरकारी सिस्टम ने शायद ही कोई राहत या रिहैबिलिटेशन योजनाएं लागू की हों ।


वर्तमान हालात और राजनीतिक दबाव

  • कांग्रेस के सांसद ने प्रधानमंत्री से लिखा है कि अगर उन्हें शर्म है तो मणिपुरी जनता से माफी माँगें, क्योंकि 2 साल से लोग कैंपों में जिये जा रहे हैं ।
  • हाल ही में एक IDP कैम्प में एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली—यह बताता है कि राज्य ने अभी भी वास्तव में राहत और पुनर्वास नहीं कराया ।
  • PM का मणिपुर दौरा संभावित 13–14 सितंबर को तय है, और माना जा रहा है कि यह राजनीतिक संदेश देने वाला कदम हो सकता है ।..

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