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जूतों पर हंगामा चड्ढी पर ख़ामोशी, 👈सोशल मीडिया पर ये एक मुहावरा गर्दिश कर रहा है
राहुल गांधी ने इंद्रा जी सामने जाकर जूते नहीं उतारे — मीडिया और सत्तपक्ष ने इसे इतना बड़ा मुद्दा बना दिया जैसे कोई राष्ट्रीय संकट हो।
लेकिन दूसरी तरफ़, 👉 धाकड़ जी ने खुलेआम "चड्डी उतार दी" (यहाँ पर RSS की खाकी निकर या "विचारधारा की पोल खोलना" एक प्रतीकात्मक तंज़ है), और इस पर न मीडिया ने सवाल उठाया, न सत्तपक्ष ने कोई आवाज़ उठाई ना कारवाही की ।
मतलब साफ है—
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जूतों पर देशव्यापी हंगामा,
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लेकिन चड्डी पर सन्नाटा!
इस पूरे व्यंग्य का तात्पर्य यही है कि राजनीति में असली मुद्दों की बजाय छोटे प्रतीकों को बड़ा करके दिखाया जाता है, और जनता का ध्यान भटकाया जाता है।
फिर Times Watch ने खोजबीन की तो पता चला असल माजरा किया है,
असल माजरा — राहुल गांधी और जूते वाला विवाद
** क्या हुआ था:**
राहुल गांधी की भोपाल यात्रा के दौरान (3 जून 2025), उन्होंने कांग्रेस कार्यालय पहुंच कर इंदिरा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की — लेकिन अपने जूते उतारे बिना।
इस दृश्य की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिससे भाजपा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पर निशाना साधा और “यह हमारे संस्कारों के खिलाफ है” जैसे मजबूत शब्द बोले। The Times of Indiawww.ndtv.comIndia Today
उनका नारा था कि— जहां सब सम्मान के संकेत में जूते उतारते हैं (जैसे कांग्रेस के जितेंद्र पटवारी), वहीं राहुल गांधी जूते पहनकर ही पुष्पांजलि अर्पित करना संस्कृति आत्मसात करने के “संसारों के खिलाफ” बताया गया। www.ndtv.comIndia Today
संक्षेप में:
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| घटना | राहुल गांधी ने जूते पहनकर इंदिरा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की |
| प्रतिक्रिया | भाजपा और मुख्यमंत्री ने इसे “संस्कृति/संसारों के खिलाफ़” बताया |
| कांग्रेस का पलटवार | कांग्रेस ने याद दिलाया कि पीएम मोदी, सीएम शिवराज आदि कई नेता भी जूते पहन कर श्रद्धांजलि देंगे—आलोचना करने से पहले खुद पर गौर करें |
