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🔥 GST बदलाव पर चिदंबरम का वार
“सरकार बताए बदलाव क्यों— धीमी विकास दर, घरेलू कर्ज़, घटती बचत या फिर बिहार चुनाव?”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने मोदी सरकार पर ज़ोरदार हमला बोला है। उन्होंने GST में हालिया बदलाव को लेकर सवालों की झड़ी लगा दी।
चिदंबरम ने कहा कि यह जानना दिलचस्प होगा कि आखिर सरकार ने यह कदम क्यों उठाया—
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क्या वजह धीमी विकास दर है❓
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या फिर बढ़ता घरेलू कर्ज़❓
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घटती घरेलू बचत तो नहीं❓
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या फिर नज़दीक आते बिहार चुनाव❓
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या फिर डोनाल्ड ट्रंप और उनके टैरिफ़ का दबाव❓
👉 चिदंबरम के इन सवालों ने सियासी गलियारों में गरमा-गरमी पैदा कर दी है।
फोकस: Chidambaram ने GST सुधारों का स्वागत किया पर कहा — “8 years too late”; साथ ही हमने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारों की प्रतिक्रिया भी जोड़ी है।
सार:
P. Chidambaram ने हालिया GST सुधार को स्वागत योग्य कहा, पर टिप्पणी की कि यह “8 साल बहुत देरी” से किया गया निर्णय है। उन्होंने सवाल उठाए कि क्या यह कदम आर्थिक दबाव (धीमी बढ़त, बढ़ता घरेलू कर्ज़, घटती बचत) या राजनीतिक वजहों (जैसे बिहार चुनाव) के चलते लिया गया। रखें: GST reform, 8 years too late, sluggish growth, Bihar elections, Trump tariffs — ये आपके मुख्य Keywords हैं। The Indian ExpressmintReuters
विस्तार — क्या कहा
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“GST rationalisation और दरों में कमी स्वागत योग्य है — पर ये कदम 8 साल देरी से लिया गया।” — P. Chidambaram की यह लाइन प्रमुख है। (Bold: GST rationalisation, 8 साल देरी). The Indian Express
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उन्होंने कहा कि मौजूदा GST का डिज़ाइन (design of GST) गलत था और इस पर कांग्रेस और अर्थशास्त्रियों की पैनी चेतावनियाँ अनसुनी कर दी गईं। Business Standard
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Chidambaram ने टाइमिंग पर सवाल उठाए — क्या कारण हैं: धीमी विकास दर, घरेलू कर्ज़, घटती बचत, बिहार चुनाव, या अमेरिका के टैरिफ़ (Trump tariffs)? यह बहु-सम्बंधित कारण हो सकते हैं। mint
(मुख्य स्रोत: Indian Express, LiveMint, Business Standard, Reuters). The Indian ExpressmintBusiness StandardReuters
What international press / business press say (अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक परिप्रेक्ष्य)
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Reuters: बताता है कि यह GST-रिफॉर्म घरेलू मांग को बढ़ाने के इरादे से आया है, और फ़ायदे-नुकसान दोनों हैं — बाजारों में सकारात्मकता, पर संभावित राजस्व हिट भी। Reuters
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Economic/Business press (ET / Business Standard): यह बड़े पैमाने पर रेट-रैशनलाइज़ेशन मानते हैं; राजस्व और राज्यों के घाटे पर भी चिंता जताई जा रही है। The Economic TimesBusiness Standard
क्या कह रहे The Wire, Alt News, Ravish Kumar और Dhruv Rathee? (आप माँगे थे — यहाँ उनके प्रमुख दृष्टिकोण और संदर्भ)
The Wire
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The Wire ने GST रिफॉर्म्स को “स्ट्रक्चरल रिफॉर्म” और राजस्व-प्रभाव व राज्यों पर असर के लिहाज़ से कवर किया है; उनकी स्टाफ-रिपोर्ट ने कहा कि स्लैब कम करने से वित्तीय तनाव/राजस्व चुनौतियाँ आएंगी और यह केवल दर-कटौती भर नहीं, बल्कि समग्र पुनर्रचना की मांग है। The Wire+1
Alt News
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Alt News ने GST-संबंधी मिसइन्फो/रुमर्स का लगातार फैक्ट-चेक किया है (उदाहरण: UPI/टैक्स अफ़वाहें, किस चीज़ पर GST नहीं लगती आदि)। उनका काम यह दिखाना है कि जमकर फैलती अफ़वाहों को संभालना ज़रूरी है, खासकर जब टैक्स-रीफॉर्म्स से जनता भ्रमित हो सकती है। (Alt News के कई GST-फैक्टचेक उदाहरण देखे जा सकते हैं)। Alt News+1
Ravish Kumar (Independent journalist)
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Ravish के प्राइम-टाइम/वीडियो-एक्सप्लेनेशन्स में अक्सर यह टोन मिलता है कि GST ने छोटे कारोबारियों और कमजोर वर्गों पर कैसे असर डाला — उनके पुराने क्लिप़्स और शृंखलाओं में GST के सामाजिक-आर्थिक असर की पड़ताल मौजूद है। (उदाहरण: Ravish का GST-decoded वीडियो)। YouTube+1
Dhruv Rathee (Digital commentator)
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Dhruv Rathee के explainer-वीडियो में GST की इम्प्लिमेंटेशन-समस्याएँ, अलग-अलग स्लैब से आम लोग कैसे भ्रमित हुए और कर-प्रभाव पर गहन विश्लेषण मिलता है — उनकी स्टाइल आम लोगों के लिए सरल भाषा में अर्थव्यवस्था समझाने की है। YouTube+1
